बजट से बॉलीवुड की उम्मीद: क्या इस बजट में सिनेमा उद्योग का टाइम आएगा?

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नरेंद्र मोदी की सरकार के पांच सालों के कार्यकाल का ये आख़िरी साल है और ऐसे में इस बजट से सबने बड़ी उम्मीदें लगा रखी हैं. आज सरकार अपना अंतरिम बजट पेश करने वाली है और ऐसे में एक इंडस्ट्री ऐसी है जिसे कुछ नए और बड़े की उम्मीद होगी. ये इंडस्ट्री भारत का सिनेमा उद्योग है जिसकी मुख्यधारा को बॉलीवुड कहते हैं. वैसे भी बॉलीवुड की शिकायत रही है कि इसे बाकी की तेज़ी से बढ़ती इंडस्ट्रीज़ की तरह तरजीह नहीं दी जाती है.

हालांकि, बॉलीवुड की इस शिकायत के समाधान की ओर तब पहला कदम बढ़ता दिखा जब पीएम मोदी ने इंडस्ट्री ने बड़े निर्माताओं-निर्देशकों और अदाकारों को मिलने के लिए बुलाया. इस मुलाकात के बाद ये जानकारी सामने आई कि बॉलीवुड और सिनेमा मेकिंग पर टैक्स घटाना और इसके सहारे राष्ट्र निर्माण करना इस मुलाकात के विषयों में शामिल थे.

इसके बाद 100 रुपए तक के टिकटों पर जीएसटी घटाकर 18 प्रतिशत से 12 प्रतिशत कर दी गई और बाकी के टिकटों पर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दी गई. इसी का शुक्रिया अदा करने के लिए बॉलीवुड की एक टीम इस साल जनवरी में पीएम मोदी से मिली. दोनों मुलाकातों के दौरान करण जौहर सिनेमा उद्योग की ओर से बड़ा चेहरा थे.

सितारों और सिनेमा के दिग्गजों की पीएम से एक और मुलाकात उस दौरान हुई जब मोदी एक फिल्म म्यूज़ियम का उद्घाटन करने मुंबई गए थे. दिसंबर के महीने में फिल्म डिविजन प्रॉपर्टी में इसका उद्घाटन किया गया था. इस दौरान टिकट की कीमतों पर जीएसटी कम करने की मांग हुई जिसकी सुनवाई भी हुई और इसे मान लिया गया.

जौहर ने दावोस में हुए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच पर इस बारे में भी बात की कि बॉलीवुड को आगे क्या उम्मीदें हैं. उन्होंने कहा, “हम कभी भी राजनीति से प्रेरित उद्योग नहीं रहे. हम में से 90 प्रतिशत लोग अ-राजनीतिक हैं. हम कुछ ज़रूरी चीज़ों पर बात करने गए थे जिनमें जीएसटी कम करना, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और पायरेसी पर लगाम लगाना जैसी बातें शामिल थीं.” उन्होंने कहा कि इन मामलों में बॉलीवुड की मदद की जा रही है.

भले ही जौहर सिनेमा उद्योग के गैर राजनीतिक होने की बात कर रहे हों लेकिन एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर से लेकर उरी तक जैसी फिल्मों ने साबित किया है कि हिंदी सिनेमा अब तेज़ी से राजनीतिक हो चला है. वहीं, ये भी कहना बेईमानी होगी कि ये अपने किसी भी दौर में अ-राजनीतिक था. हां, प्रोपेगेंडा के तौर पर इसका इस्तेमाल नया है या नहीं इस पर बहस की जा सकती है.

ऐसे समय में जब टिकटों की कीमतें बढ़ रही हैं तो बॉलीवुड के लिए फिल्म के बजट और सफलता के बीच तालमेल बिठाना मुश्किल हो रहा है. उन्हें सरकार से उम्मीद होगी कि सरकार इसमें उनकी मदद करेगी. देखने वाली बात होगी कि क्या इस साल का बजट उनकी उम्मीदें पूरी कर पाता है.


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