जलियांवाला बाग कांड के बाद भी जारी था उत्पीड़न, डायर ने दिया था भारतीयों को रेंगने का आदेश

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अविभाजित पंजाब के अमृतसर में 13 अप्रैल 1919 को हुआ जलियांवाला बाग कांड  के बाद भी भारतीयों के उत्पीड़न का दौर जारी रहा। ब्रिटिश प्रशासन भारतीयों पर किसी तरह तरस खाने के मूड में नहीं था और उसने 16 अप्रैल को मार्शल कानून लागू करके उत्पीड़न जारी रखा। आज जलियांवाला बाग कांड की 100वीं बरसी पर जानिए, जनरल डायर  ने क्यों दिया था भारतीयों को रेंगने का आदेश। 

बता दें कि 13 अप्रैल को जलियांवाला बाग हत्याकांड की 100वीं बरसी है। 1919 में हुआ जलियांवाला बाग हत्याकांड भारत के इतिहास के काले पन्नों में दर्ज है। एक शांतिपूर्ण सभा के दौरान अंग्रेज अधिकारी जनरल डायर ने वहां उपस्थित लोगों पर गोलियां चलाने का आदेश दे दिया था। इस हत्याकांड में सैकड़ों जानें गई थीं। जनरल डायर को पंजाब का कसाई कहा जाता है। 

जनरल डायर ने 19 अप्रैल 1919 को भारतीयों को उस गली में रेंगने का आदेश दिया था, जहां एक ब्रिटिश मिशनरी टीचर पर हमला हुआ था। इसके अलावा सार्वजनिक रूप से कोड़े बरसाए गए और अंधाधुंध गिरफ्तारी भी हुई। नरसंहार पर कांग्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिस गली में रेंगने का आदेश दिया गया था, वह बहुत संकरी थी और वह काफी घनी आबादी वाला क्षेत्र था। गली के दोनों ओर दो-मंजिला इमारतें थीं। 

स्वास्थ्य और सफाई की सुविधाओं से वंचित कर दिया था
इस गली में रहने वाले लोगों को अगर किसी खरीददारी या फिर शहर से किसी काम के चलते बाहर जाना भी पड़ता था तो उनके पास इस गली से गुजरने का और कोई रास्ता नहीं था और इसलिए उन्हें रेंगकर अंदर जाना और बाहर आना पड़ता था। सिर्फ यही नहीं ब्रिटिश प्रशासन ने इस गली में रहने वाले लोगों का जीना मुहाल करने के लिए सैनिटरी और मेडिकल सुविधाओं से भी वंचित कर दिया था। इसके लिए रेंगकर जाने की ही शर्त रखी गई थी। इसी गली में डायर ने कोड़े बरसाने के लिए भी जगह बनाई थी। 
डायर ने लिया था महिलाओं पर हमले का बदला 
इस गली के 150 यार्ड के हिस्से में रेंगने के आदेश को लागू करने पर स्पष्टीकरण देते हुए ब्रिगेडियर जनरल डायर ने हंटर कमिशन से कहा था, ‘मुझे लगा कि महिलाओं को पीटा गया था। हम महिलाओं को पवित्र मानते हैं। इसलिए इसकी उपयुक्त सजा के लिए मैंने विचार किया। मैंने गली के दोनों छोर पर चौकियां तैनात कर दीं और उनसे कहा कि किसी भी भारतीय को इनसे गुजरे बिना जाने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।’ यह आदेश 24 अप्रैल 1919 तक लागू रहा और 50 पुरुषों को पेट के बल रेंगने को मजबूर होना पड़ा। 

50 पुरुषों को रेंगकर जाना पड़ा
 
जनरल डायर ने कहा था, ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक समझदार इनसान इन परिस्थितियों से गुजरेगा। मेरा आदेश 19 अप्रैल की दोपहर से 24 अप्रैल 1919 तक लागू रहा। इस दौरान करीब 50 पुरुषों को सभी चौकियों पर रेंग कर जाना पड़ा। लेकिन मुझे यह नहीं पता कि उन्होंने ऐसा क्यों किया क्योंकि हर घर में पीछे का दरवाजा भी था और चौकी की ड्यूटी सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक की रहती थी।’ 

बच्चों के कपड़े उतारकर कोड़े बरसाए जाते थे
 
जनरल डायर ने बताया था, ‘इसका निष्कर्ष यही निकलकर आता है कि जिन लोगों ने ऐसा किया वे खुद को शहीद करना चाहते थे।’ इसके अलावा ब्रिटिश सेना ने पूरे पंजाब भर के लोगों को इंग्लिश अधिकारियों को सलाम करने का आदेश दिया था। उन्हें ब्रिटिशर्स को सलाम करने के लिए मजबूर किया गया। इसके अलावा सार्वजनिक रूप से लोगों पर कोड़े भी बरसाएं जिनमें बच्चे भी शामिल थे, जिन्हें सामने लाने से पहले कपड़े उतारे जाते थे। 

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