Rafale Deal: हताशा में अब कोर्ट की भी अवमानना कर रहे राहुल- भाजपा

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राफेल मामले में दस्तावेजों की प्रासंगिकता पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही राहुल की ओर से भ्रष्टाचार पर दिए गए बयान को भाजपा ने हताशा करार दिया। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने जहां साफ किया कि यह फैसला केवल सुनवाई की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। वहीं केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि फैसले में राफेल खरीद पर न तो सुनवाई हुई है और न ही कोई बात कही गई है। लेकिन राहुल चोर चोर चिल्लाकर कोर्ट के मुंह में अपनी बात डालने की कोशिश कर रहे हैं। यह सीधे तौर पर अवमानना है। सीतारमण ने कांग्रेस अध्यक्ष से सवाल किया कि जो बात वह कह रहे हैं, यह बात सुप्रीम कोर्ट ने कहां कही है? सीतारमण ने राहुल पर निशाना साधते हुए कहा कि जो खुद जमानत पर हैं, उन्हें कोर्ट के फैसले की गलत जानकारी देने का अधिकार किसने दिया? भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने आधा पैराग्राफ भी नहीं पढ़ा लेकिन वह कह रहे हैं कि कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है कि और यह भी कह रहे हैं कि कोर्ट ने कहा है चौकीदार चोर है।

यह अदालत की अवमानना का मामला है।निर्मला सीतारमण ने कहा, एक अंग्रेजी पत्रिका ने गलत तरीके से हासिल किए दस्तावेजों को आशिंक तौर पर छापा और बाद में कुछ अखबार और मैगजीन में प्रकाशित किया गया। इन दस्तावेजों को आधार बनाकर याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने साक्ष्य माना है। सुप्रीम कोर्ट इसे साक्ष्य मानकर दिसंबर 2018 में दिए गए अपने फैसले पर पुनर्विचार कर सकता है। पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई अभी भविष्य में होगी।

वहीं इस विवादास्पद मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के आदेश पर अपनी प्रतिक्रिया में रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि राफेल सौदा मामले में याचिकाकर्ता राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित आंतरिक गोपनीय मंत्रणा के अंश चुनकर अधूरी तस्वीर पेश करने के इरादे से कुछ दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रहे है। याचिकाकर्ताओं द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों से यह पता नहीं चलता है कि इस मुद्दे पर सक्षम प्राधिकारियों ने कैसे विचार किया, कैसे समाधान निकाला और कैसे इसे आवश्यक मंजूरी दी गई।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सरकार ने उच्चतम न्यायालय की इच्छा के मुताबिक अपेक्षित सूचना उपलब्ध कराई थी और अदालत के निर्देश के अनुसार याचिकाकर्ताओं को भी सूचना उपलब्ध कराई गई थी। इसके साथ ही कैग द्वारा मांगे गए सभी रिकॉर्ड और फाइल भी उपलब्ध कराई गई हैं। लेकिन सरकार की मुख्य चिंता सार्वजनिक क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित संवेदनशील और वर्गीकृत जानकारी की उपलब्धता से संबंधित है।

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