सपा से गठबंधन पर बोलीं मायावती- गेस्ट हाउस कांड से ऊपर है जनहित

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बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और समाजवादी (सपा) ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए गठबंधन का ऐलान किया है. बसपा प्रमुख मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सीटों के बंटवारे की घोषणा की. मायावती ने कहा कि समाजवादी पार्टी के साथ 1993 में विधानसभा चुनावों में कांशीराम और मुलायाम सिंह के गठबंधन में चुनाव लड़ा गया और सरकार बनाई गई थी. उन्होंने कहा कि बीजेपी की जहरीली, सांप्रदायिक और जातिवादी राजनीतिक से प्रदेश को दूर रखने की मंशा ऐसा किया गया था. देश में दोबारा ऐसे हालातों के बीच बसपा ने एक बार फिर ऐसा करने की जरूरत महसूस की है.

मायावती ने कहा कि बसपा ने आगामी लोकसभा चुनावों में एक बार फिर समाजवादी पार्टी के साथ इस गठबंधन को करने का फैसला किया है. आने वाले समय में 2019 में हुए इस गठबंधन को एक प्रकार से नए राजनीतिक क्रांति का समय माना जाएगा. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मायावती ने गेस्ट हाउस कांड का कई बार जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पार्टी ने 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड से देश को ऊपर रखते हुए गठबंधन का फैसला लिया है. गेस्ट हाउस कांड से जनहित ऊपर है.

बसपा प्रमुख ने कहा कि 4 जनवरी को दिल्ली में हुई बैठक में हमने प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों पर गठबंधन में चुनाव लड़ने का फैसला किया था. इसकी भनक शायद बीजेपी को हो गई थी जिसकी वजह से हमारे सहयोगी अखिलेश यादव की छवि धूमिल करने के लिए जबरन उनका नाम खनन घोटाले में शामिल किया गया.

क्या है गेस्ट हाउस कांड

असल में, 1993 का विधानसभा चुनाव सपा और बसपा ने साथ मिलकर लड़ा था. इस गठबंधन ने 4 दिसंबर 1993 को सत्ता की कमान संभाली, लेकिन 2 जून, 1995 को बसपा ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया. इस तरह दोनों का गठबंधन टूट गया. बसपा के समर्थन वापसी से मुलायम सिंह की सरकार अल्पमत में आ गई. इसके बाद 2 जून 1995 को उन्मादी भीड़ ने सबक सिखाने के नाम पर बसपा सुप्रीमो पर हमला करने की कोशिश की.

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