ऐसे बीते थे शहीद इंस्पेक्टर के आखिरी पल, सिर पर लगा था पत्थर

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बुलंदशहर हिंसा पर यूपी के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर आनंद कुमार ने मंगलवार को शहीद इंस्पेक्टर के आखिरी पलों की पूरी कहानी बताई.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में आनंद कुमार ने बताया कि सुबोध सिंह को पहले कोई पत्थर लगा, जिससे वे चौकी के ही प्रांगण में दीवार के सहारे गिर गए. इस पर पुलिसकर्मियों ने उन्हें गाड़ी पीछे कर अस्पताल ले जाने की कोशिश की. तभी खेत की तरफ जहां उनकी गाड़ी थी, भीड़ वहां भी आ गई. वहां भी भारी पथराव और गोलीबारी हुई. आसपास कालोनी के लोगों ने दरवाजा बंद कर लिया. लोगों ने इंस्पेक्टर की गाड़ी तोड़ दी तो दूसरी गाड़ी का इंतजाम करने के लिए पुलिसकर्मी गए. बाद में दूसरी गाड़ी से सुबोध को सीएचसी ले जाया गया. पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा कि बाकी सारी चीजें अभी जांच के दायरे में है.

साथी पुलिस वालों के रोल के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन सारी परिस्थितियों पर गौर किया जाएगा कि पुलिसवाले उस समय कहां थे. क्या इंस्पेक्टर ने फोर्स की डिमांड की थी, इस पर उन्होंने कहा कि क्या फोर्स की डिमांड सही समय पर की गई, इसकी जांच की जाएगी.

उन्होंने बताया कि हिंसा में जिस लड़के सुमित की मौत हुई है, उसकी उम्र 18-20 साल है. उसकी बॉडी से एक गोली बरामद हुई है. गोली एसएफएल भेज दी गई है, जिससे गोली का कैलिबर पता चल जाएगा. इससे पता चलेगा कि गोली किस हथियार से चली है.

इंस्पेक्टर को कितनी नजदीक से गोली मारी गई, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक प्वाइंट ब्लैक से गोली मारने की बात अभी नहीं कही जा सकती. एसआईटी की जांच में सभी कुछ साफ होगा.

इंस्पेक्टर सुबोध के परिवार की शिकायत के सवाल पर उन्होंने कहा कि परिवार की जो भी शिकायत है, उसे दूर किया जाएगा. हमारी पूरी संवेदना उनके परिवार के साथ है.

पहले किसने फायरिंग की, इस पर उन्होंने कहा कि प्राथमिक जांच में पता चला है कि ग्रामीणों ने कट्टे से फायरिंग की थी. पुलिस ने बाद में हवाई फायरिंग की.

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