दीवाली(Deepavali) से पहले ही दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण (Delhi Air Pollution) खतरनाक स्तर पर बढ़ गया है.  हवा इतनी जहरीली हो चुकी है कि सिगरेट पीने वाले और सिगरेट नहीं पीने वाले दोनों के फेफड़े बराबर खराब होने लगे हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक 24 घंटे में 22 सिगरेट पीने जितना प्रदूषण हवा में है. दिल्ली में सर गंगा राम अस्तपाल के फेफड़ों के सर्जन डॉ. अरविंद कुमार का कहना है दो दशक पहले उनके पास खराब फेंफड़े की शिकायत लेकर 9 मरीज़ ऐसे आते थे जो सिगरेट पीते थे. सिर्फ एक मरीज़ ऐसा होता था जो सिगरेट नहीं पीता था लेकिन अब दोनों के मरीज़ बराबर की संख्या में आते हैं. ज़ाहिर है उनका यह अनुभव सिर्फ नवंबर महीने का नहीं है बल्कि दिल्ली के साल भर के मौसम का है. दिल्ली में 5 नवंबर को पी एम 2.5, 644 हो गया था. सुरक्षित सीमा से बीस गुना ज़्यादा हवा ख़राब थी. दिल्ली एनसीआर के कई इलाकों में हवा की क्वॉलिटी (Delhi Air Quality) गिरती जा रही है.आपको बता दें कि दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने का मुख्य कारण पंजाब और हरियाणा में जलाई जाने वाली पराली है. रविवार से हवा का रुख पंजाब-हरियाणा से दिल्ली (Delhi) की तरफ है, जिसके चलते रातों रात दिल्ली में प्रदूषण (Air Pollution In Delhi) का स्तर बढ़ा है. साथ ही दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के लिए गाड़ियां भी जिम्मेदार हैं.

प्रदूषण से ऐसे सेहत पर असर
वायुमंडल में मौजूद प्रदूषण के कई तत्व अलग-अलग तरह से सेहत पर असर डालते हैं. बानगी के तौर पर देखें तो PM कण से अस्थमा, हृदय रोग, कैंसर होने की आशंका होती है. वहीं  कार्बन डायऑक्साइड  से सुस्ती, भूलने की बीमारी., ओजोन से आंखों में जलन, सांस और फेफड़े से संबंधित रोग होते हैं, जबकि सल्फर डायऑक्साइड से सांस लेने में मुश्किल, फेफड़े को नुकसान, नाइट्रोजन डायऑक्साइड से गले और फेफड़े में संक्रमण की आशंका होती है.

दिल्ली में प्रदूषण के पांच कारण
मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ की रिपोर्ट में दिल्ली में प्रदूषण के पांच कारण बताए गए हैं. इनमें पहला कारण बाहरी राज्यों से आने वाली करीब 45 लाख गाड़ियां और दिल्ली में जरुरी सामान पहुंचाने वाले ट्रक हैं. प्रदूषण का दूसरा कारण उद्योग और लैंडफिल साइट हैं जिनके चलते करीब 23 फीसदी प्रदूषण होता है. तीसरा कारण दिल्ली की हवा में मिला हुआ दूसरे राज्यों का धूल, कण और धुंआ है. चौथा कारण दिल्ली में चलने वाला कंस्ट्रक्शन और लोगों द्वारा जलाने वाला कूड़ा है. इनसे दिल्ली में करीब 12 फीसदी प्रदूषण होता है. प्रदूषण का पांचवा कारण दिल्ली के रिहायशी इलाके हैं, जहां रसोई से निकलने वाले धुंए, DG सेट जैसी चीजों से करीब 6 फीसदी प्रदूषण होता है.

देश के 10 सबसे प्रदूषित शहर
राजधानी दिल्ली के साथ ही देश के कई शहरों में प्रदूषण बेहद खतरनाक स्तर पर है. देश के 10 सबसे पॉल्यूटेड शहरों की बात करें तो इनमें दिल्ली, बुलंदशहर, बाघपत, कानपुर, गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद, ग्रेटर नोएडा, मुजफ्फरपुर और लखनऊ शामिल है. इन सभी शहरों में प्रदूषक तत्व पीएम 2.5 स्तर है. इन शहरों में एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 340 से 450 के बीच है

आइये जानते हैं इस प्रदूषण से बचने के तरीके
1. बढ़ते प्रदूषण का बड़ा कारण गाड़ियां हैं, ऐसे में कम से कम वाहन का इस्तेमाल करें. आप आने जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर सकते हैं.
2. घर के बाहर मास्क लगाकर निकलें. प्रदूषण से बचने के लिए एन-95 से ऊपर के ही मास्क खरीदने चाहिए. ये मास्क आपको सूक्ष्म कणों से भी बचाते हैं.
3. खतरनाक प्रदूषण स्तर पर घर के बाहर कसरत करने से बचें.
4. घर में साफ सफाई का ध्यान रखें, धूल और मिट्टी जमा न होने दें.
5. ऐसे प्रदूषण में कई लोगों को सांस लेने में ज्यादा पेरशानी होती है, ऐसे में डॉक्टर को जरूर दिखाएं.
6. अपने घर में अच्छा वातावरण बनाएं, घर में पौधे लगाएं जिससे आपको शुद्ध हवा मिल सके.
7. ऐसे वातावरण में बाहर से घर वापस आने के बाद  मुंह, हाथ और पैर साफ पानी से धोएं.
8. आप अपने घर में शुद्ध हवा के लिए एयर प्यूरीफायर लगवा सकते हैं

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